एक दिन तेरा प्राणका पन्छी
एक दिन तेरा प्राणका पन्छी,
उडजाएगा तनसे
सोचो बिचारो हरिको पुकारो,
वो दिन याद करो
झुठा से सब जगत बनाया,
झुठी मन की आशा
सचाई तो कुछ भी नही यहाँ,
झुठा खेल तमासा
सोचो बिचारो हरिको पुकारो,
वो दिन याद करो
देह ढलेगा मिट्टी मिलेगा
साथ न कोहि चलेगा
जिन्दगी भरका तेरी कमाइ,
वो भी यहि रहेगा
जाना होगा तुझको अकेला,
वो दिन याद करो
यमका दुतने घेरा डाल्के,
लेजयेगा तुझको
पुछेका फिर यमका राजा
क्या बात लाएगा उनको
पुण्य कमाई कुछभी नही यहाँ,
वो दिन याद करो
हरिका भजन बिना यह जगमें,
नरका जीना बेकारा
सोचो सम्झाकर हरिका भजन पर,
ध्यान धारो एक मनमें
सपन से जब बिपना मिलेगा,
वो दिन याद करो
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